छत्तीसगढ में पशु चिकित्सकों को बनाया बली का बकरा : 9 निलंबित

पशु संदेश, भोपाल | 20 अगस्त 2017  

छत्तीसगढ के दुर्ग और बेमेतारा जिले  की तीन गौशालाओं में बुधवार से शुक्रवार के बीच हुई गायों की मौत का मामला सामने आने के बाद छत्तीसगढ शासन ने शनिवार को आनन फानन में, गौशाला में अनियमितता होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं करने के आरोप में पशु पालन विभाग के 2 उपसंचालक, 4 पशु चिकत्सकों सहित कुल 9 लोगों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है | सरकार द्वारा किये गए पशु चिकित्सकों के निलंबन से राज्य के पशु चिकित्सकों में रोष है |

यह है पूरा मामला

पिछले सप्ताह छत्तीसगढ के एक भाजपा नेता हरीश वर्मा और उसके परिजनों द्वारा संचालित तीन सरकारी सहायता प्राप्त गौशालाओं में दर्जनों गायों की मौत हो गई | गौशाला में गायों की मौतों की खबर मीडिया में आई तो राज्य में हंगामा हो गया | इस मामले में छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई | आयोग की शिकयत पर शुक्रवार (18 अगस्‍त) को पुलिस ने हरीश वर्मा को गिरफ्तार कर लिया | वर्मा के खिलाफ छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 की धारा चार और छह तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम-1960 की धारा 11 तथा भादवि की धारा 409 के तहत मामला दर्ज किया गया | मीडिया में मामला गर्माने के बाद तथा राजनैतिक विरोध बढ़ता देख राज्य शासन ने शनिवार को पशु पालन विभाग के 2 उपसंचालक तथा 4 पशु चिकत्सकों सहित कुल 9 लोगों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है |

ऐसे चला घटनाक्रम

सरकार है, ऊपर से आदेश मिलने के बाद जो चाहे जितनी जल्दी चाहे फैसला ले सकती है | कर्मचारी-अधिकारी सब सरकार का फैसला मानाने के लिए बाध्य हैं | छत्तीसगढ में भी घटनाक्रम इसी तर्ज पर तेजी से चला |  राज्य के कृषि एवं पशु पालन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल इस वक्त सरकारी दौरे पर इजराइल में हैं | उन्होंने वहीं से शनिवार तक गौशालाओं में गायों की मौत पर रिपोर्ट मांगी थी | राज्य शासन ने एक ही दिन में जाँच भी पूरी कर ली और जाँच रिपोर्ट मंत्री महोदय को इजराइल भेज भी दी | मंत्री महोदय ने भी तत्काल, रिपोर्ट में दोषी पाये गये अधिकारीयों के खिलाफ सख्त कार्यवाही के निर्देश इजराइल से ही जारी कर दिये | दिन ढलते ढलते पशु पालन विभाग के 2 उपसंचालक, 4 पशु चिकत्सकों सहित कुल 9 लोगों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया  |  सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जाँच रिपोर्ट में गौशाला में अनियमितता होने के बावजूद कोई कार्यवाही नहीं करने का अधिकारियों को दोषी पाया गया है |

घटना का दूसरा पहलु

इस पूरी घटना का दूसरा पहलु भी सामने आ रहा है, वह यह है कि राज्य में वर्ष 2018 में विधानसभा चुनाव होने हैं । जिस गौशाला में गायों की मौत हुई उस का संचालक हरीश वर्मा राज्य में सत्तारूढ़ दल भाजपा का नेता है और जामुल नगर पालिका उपाध्यक्ष भी है | बीजेपी नेता की गोशाला में मारी गयी गायों को लेकर बवाल इस कदर बढ़ गया कि राज्य भर में बीजेपी के खिलाफ धरने प्रदर्शन शुरू हो गए। ऐसे में सरकार अपनी छवि बचाने हेतू  सख्त कार्यवाही के द्वारा जनता को गौ रक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का संदेश देना चहती थी | इसी राजनैतिक मंशा के चलते ही डैमेज कंट्रोल करने हेतू पशु चिकित्सकों को बली का बकरा बना कर उनके निलंबन की कार्यावाही की गई है | मृत गायों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट पता चलता है कि गायों की मौत भूख के चलते हुई है |गौशाला में गायों को चारा पानी उपलब्ध कराना गौशाला के संचालक मंडल की जबाबदारी है ना की पशु चिकित्सकों की | प्रत्यक्ष्दर्शीयों ने भी मीडिया को बताया है कि यहां की गायें बेहद कमजोर हैं, गौशाला में ना तो चारा है और ना ही दाना-पानी | 

गौ सेवा आयोग की कार्यप्रणाली पर भी उठ रहे हैं सवाल

पूरे घटनाक्रम में सवाल राज्य गौ सेवा आयोग की कार्यप्रणाली पर भी उठ रहे हैं, क्योंकी गौशालाओं के पंजीयन से लेकर उन्हें आर्थिक अनुदान देने तथा उनके सुचारू संचालन का दयित्तव राज्य गौ सेवा आयोग का है | गौशालाओं अनिमिताओं के बावजूद भी यदि पशुपालन विभाग के अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे थे तो राज्य गौ सेवा आयोग अब तक क्या कर रहा था ? आयोग ने समय रहते लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्यावाही क्यों नहीं की ?? यदि आयोग अपना काम मुस्तैदी और ईमानदारी से करता, अनुदान की राशी समय से गौशालाओं तक पहुँचाता तो आज इस तरह की घटना सामने नहीं आती |

पशु चिकित्सकों का नहीं कोई दोष

राज्य के पशु चिकित्सकों का कहना है कि गायों को चारा पानी उपलब्ध करवाना गौशाला संचालक का काम है, यदि भूख से गायों की मौत हुई है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी गौशाला संचालक मंडल की है | पशु चिकित्सकों का इसमें कोई दोष नहीं है | राज्य के पशु चिकित्सक गौशालाओं के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वाह पूरी निष्ठा के साथ कर रहे हैं | पशु चिकित्सकों को गौशाला के कार्यों में एक हद से अधिक हस्तक्षेप का कोई संवेधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है | पशु चिकित्सकों को सॉफ्ट टार्गेट मान कर निशाना बनाया जा रहा है | निलंबन की इस कार्यावाही का, राज्य के पशु चिकित्सकों के मनोबल पर विपरीत प्रभाव पडेगा |

गौशाला में भूख से गायों की मौत अत्यंत दुःख का विषय है | इस अपराध के असली गुनहगारों की पहचान कर उन पर कड़ी से कड़ी कार्यावाही होनी चाहीये, पर तात्कालिक लाभ के लिए निर्दोषों को बली का बकरा बनाया जाना भी उचित नहीं है | पूरे मामले की निष्पक्ष-गहन जाँच हो, जो भी दोषी पाया जाये उसे कड़ी सजा मिले ताकी भविष्य में ऐसी  दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो |