हिमाचल में 42 वर्षों के अन्तराल के बाद डेनमार्क से आये 6 जर्सी बुल

पशु संदेश, भोपाल | 18 मार्च 2017  

हिमाचल प्रदेश में 42 वर्षों के अन्तराल के बाद डेनमार्क से 6 जर्सी बुल्स का आयात किया गया है। ये बुल उच्च नस्ल के हैं तथा पालमपुर में इनका पालन किया जा रहा है। प्रत्येक बैल में 6000 लीटर उत्पादन की क्षमता है अर्थात इनकी संतान 20 लीटर प्रतिदिन की दुग्ध उत्पादन क्षमता रखती हैं। वर्तमान में विभाग में 10 से 14 लीटर प्रतिदिन की उत्पादकता वाले पशु हैं। इन बैलों की कीमत 54 लाख रुपये है। यह जानकारी राज्य के पशुपालन मंत्री अनिल शर्मा ने हिमाचल प्रदेश पशुधन तथा कुक्कुटपालन विकास बोर्ड की शासकीय निकाय की 23वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए दी।  

बैठक में उन्होंने बताया कि सोलन जिला के कोटला-बड़ोग में 1.5 करोड़ रुपये की लागत से एम्ब्र्यो ट्रांसफर टेक्नोलॉजी (ETT) लैब आरम्भ करने के लिए परियोजना प्रस्ताव भारत सरकार को स्वीकृति के लिए भेजा गया है, इसके अन्तर्गत स्वदेशी साहीवाल गायों के लिए ETT लैब स्थापित की जाएगी। 

पशुपालन मंत्री ने कहा कि पालमपुर, सोलन तथा घणाहट्टी में नए लिक्विड नाईट्रोजन प्लांटस की स्थापना के पश्चात आज प्रदेश में कुल 368 नए कृत्रिम वीर्यरोपण केन्द्र कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि विभाग के 3429 संस्थानों में से 2944 संस्थानों में यह सुविधा प्रदान की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में मण्डी तथा हमीरपुर के ताल में इसी तरह के नए प्लांट्स स्थापित किए जाएंगे। 

बैठक में बोर्ड के सदस्यों को अवगत करवाया गया कि बोर्ड के पास 5.40 करोड़ रुपये की कॉरप्स निधि तथा तीन करोड़ रुपये की वार्षिक आय है। शासकीय निकाय ने हिमाचल प्रदेश पशुधन विकास बोर्ड के वर्तमान वित्त वर्ष की आय तथा व्यय को भी स्वीकृति प्रदान की, जिसमें 1720 लाख रुपये की प्राप्तियां शामिल हैं। इसके साथ ही बीमार पशुओं के लिए दो अलग से शैड, बैल शैड, सोलन वीर्य बैंक की पार्किंग परिसर के निर्माण के अलावा नाहन, सोलन तथा सुन्दरनगर के कुक्कुट फार्मों की अधोसरचना को सुदृढ़ करने के लिए भी धनराशि प्रदान करने को स्वीकृति दी। बैठक में बताया गया कि सुन्दरनगर में नए हैचरी भवन के निर्माण के लिए 15.32 लाख रुपये जारी किए गए हैं।

बैठक में प्रधान सचिव (पशुपालन) श्री ओंकार शर्मा ने विभाग के अधिकारियों से प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने के लिए समर्पण की भावना से कार्य करने को कहा ताकि ग्रामीण महिलाओं की आर्थिकी को सुदृढ़ किया जा सके। उन्होंने प्रदेश के सभी पशु ब्रीडिंग फार्म, वीर्य स्टेशन, वीर्य बैंक, ईटीटी लैब तथा कुक्कुट-पालन हैचरीज के आधुनिकीकरण तथा सुधार के लिए भी कहा।

निदेशक डॉ. आर.के. आनन्द ने कार्यवाही का संचालन किया तथा संयुक्त निदेशक डा. युनिस अंसारी ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। बैठक में बोर्ड के अधिकारिक तथा गैर-अधिकारिक सदस्यों के अलावा प्रदेश के विभिन्न जिलों के एडीसी, डॉ. के.डी. रयार्ट, डॉ. बी.एस. तंवर तथा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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