अकाल से निपटने राजस्थान में समस्त महाजन ने गौशलाओं को गोद लिया

पशु संदेश, 18 May 2019

र्डॉ आर बी चौधरी

समस्त महाजन के मैनेजिंग ट्रस्टी गिरीश भाई शाह,सदस्य भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड ने राजस्थान में अकाल से मरने वाले पशुओं की मृत्यु पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि राजस्थान में अकाल और सूखे से निपटने के लिए स्थाई हल ढूंढना होगा। यही कारण है कि आज यहां तीन  दिवसीय जीव दया, पशु संरक्षण-संवर्धन का प्रशिक्षण आरंभ किया जा रहा है।प्रथम सत्र के शुभारंभ के अवसर पर वह राजस्थान से आए विभिन्न क्षेत्रों जैसे - मारवाड़ बाड़मेर और जैसलमेर के 100 से अधिक  गौशाला कार्यकर्ताओं से अनुरोध किया कि राजस्थान में आपदाओं से  गोवंशीय पशुओ  के साथ-साथ अन्य पशुओं-पक्षियों के प्राण रक्षा के लिए स्थाई निराकरण ढूंढने रास्ता बताया जाएगा।फिर उपाय ढूंढने के बाद उस पर साथ साथ काम किया जाएगा ताकि जल्दी से जल्दी अपने लक्ष्य पर पहुंचा जा सके।

उन्होंने बताया कि राजस्थान आपदा प्रबंधन के विषय में काम करने की व्यापक संभावनाएं हैं किंतु पारंपरिक एवं प्राकृतिक उपायों को नजर अंदाज करने से हालात ज्यों की त्यों बने हुए है । समस्त महाजन इस दिशा में एक अत्यंत व्यावहारिक एवं सफल स्कीम चला रहा है जिसके माध्यम से गांव पशुओं का संरक्षण संवर्धन कर उनके ऊपर हो रहे अत्याचार नियंत्रित करने में सफलता मिलेगी अपितु टिकाऊ खेती  को बढ़ावा देते हुए पशु पक्षियों का संरक्षण  कार्यक्रम  तेज हो जायेगा । उन्होंने बताया कि हर साल  तकरीबन 300 करोड रुपए आपदा प्रबंधन पर  खर्च किए जाते हैं किंतु हर साल अकाल कि उग्रता बढ़ती जा रही है। कुदरती एवं बुनियादी संसाधनों का दुरुपयोग होने के कारण आज हालत दिन-ब-दिन बदतर होते जा रहे है। उन्होंने कहा कि  पूरे राजस्थान में काली छाया मडरा  रही है। समस्या के स्थाई निदान के लिए गिरीश भाई शाह ने जीव दया और गौशाला प्रबंधन में लीन एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम में शरीक हुए प्रतिभागियों को एकजुट होने और अधिक से अधिक लोगों को शरीक करने का आग्रह किया। आगे अनुरोध करते हुए यह भी कहा कि कुदरत की बनाई  गई व्यवस्था का सम्मान करना होगा। गौशाला प्रबंधन में गांव से ही अगर चारा -दाना,पेय जल एवं आवासीय प्रबंध सुनिश्चित कर लिया जाए तो अन्य छोटी-मोटी प्रबंधन अपने आप हो जाती है।

उन्होंने कहा कि किसी भी गौशाला कार्यकर्ता को कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं है।  गांव के संसाधन जैसे तालाब,बागीचा ,चारागाह और ग्राम सभाओं या पंचायतों की सहभागिता बनी रहे तो गौशाला प्रबंधन मे कोई भी परेशानी नहीं आएगी। इस अवसर पर गिरीश भाई  ने 25 गांव के गौशालाओं और संबंधित जन प्रतिनिधियों के  माध्यम से  एक क्लस्टर बनाने का प्रस्ताव रखा और उन्होंने कहा कि इस 25 गांव के परिधि में अयोग्य 300 एकड़ पर फैले बबूल के झाड़ को काटकर उस जमीन को उपजाऊ बनाया जाएगा। जहां चारा उत्पादन करने,जल संचय व्यवस्था बनाने एवं वृक्षारोपण करने के लिए समस्त महाजन 25 जेसीबी देने के लिए तैयार है ताकि 25 गांव के बनाए गए क्लस्टर को विकसित किया जा सके। इस प्रकार आगामी वर्षों में राजस्थान के कई अकाल पीड़ित क्षेत्रों को कवर कर लिया  जाएगा ताकि अकाल से स्थाई समाधान मिल सके ।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के संयोजक एवं समस्त महाजन के ट्रस्टी देवेंद्र भाई ने  बताया कि  यह प्रशिक्षण कार्यक्रम परलाई, भिंडवाड़ा से आरंभ होकर पावापुरी तीर्थ के पी सिंघवी जीव रक्षा केंद्र तक  भ्रमण किया गया।जहां सभी प्रतिभागियों ने स्वावलंबी गौ संरक्षण का प्रबंधन  कार्य देखा। उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण किताबी ज्ञान से अलग हैं क्योंकि हम जो काम अच्छा समझते उसे तन-मन से करते हैं ताकि उसकी सफलता शत- प्रतिशत प्राप्त हो। इसलिए प्रशिक्षण कार्यक्रम में उसी विषय वस्तु की चर्चा करते और उसका व्यवहारिक स्वरूप दिखाते हैं। उन्होंने यह भी  बताया कि  समस्त महाजन का यह  कार्यक्रम अगले दो दिनों और तक चलाया जाएगा ।जहां पर गोचर विकास,जल संरक्षण,गौशाला स्वाबलंबन के सफलताओं को दिखाकर गौशाला स्वाबलंबन के गुर सिखाए जाएंगे। कार्यक्रम में गुजरात से आई जीव दया कार्यकर्ता बहन नेहा बेन,राजस्थान के प्रख्यात संत स्वामी रघुनाथ भारती ,जोधपुर के थानवीजी आदि प्रवक्ता मौजूद थे और सभी ने अपने - अपने विचार रखे जिसमें ऑर्गेनिक खेती तथा पशुओं से संचालित कृषि व्यवस्था ,विशेषकर बैलों के प्रयोग पर जोर दिया गया। साथ ही देसी गोवंश के नस्लों के संरक्षण एवं बैलों के विशेष प्रयोग की योजना पर बल दिया गया। 

र्डॉ आर बी चौधरी

(पूर्व मीडिया हेड एवं प्रधान संपादक,,भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड , भारत सरकार)