लखनऊ शहर में विश्व पशु चिकित्सा दिवस मनाया गया 

उत्तर प्रदेश में प्रति 5 हजार पशु पर एक स्नातक  पशु चिकित्सक - एक चिंता

Pashu Sandesh, 29th April 2019                                                                                                                 

रिपोर्ट : सबा बानो

27 अप्रैल को हर साल दुनिया भर में  विश्व पशु चिकित्सा दिवस  मनाया जाता है| लखनऊ शहर में भी इसे बड़े धूमधाम से मनाया गया| शहर के कई भागों में  पशु चिकित्सा से जुड़े सरकारी गैर सरकारी पशु चिकित्सकों, पशु प्रेमियों, जीव जंतु कल्याण संस्थाओं  जैसे एसपीसीए, गौशालाए  तथा अनेक स्वयंसेवी संस्थाओं ने पशु चिकित्सा संबंधी कार्यक्रम आयोजित किए| विभिन्न सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार  लखनऊ एनिमल वेलफेयर सोसायटी, पशुपालन विभाग उत्तर प्रदेश , गौ सेवा आयोग, कान्हा उपवन,  लखनऊ एसपीसीए, जीव आश्रय  तथा यूनाइट फाउंडेशन जैसे  कई संस्थाओं ने पशु चिकित्सा संबंधी क्रियाकलाप आयोजित कर पशुओं के स्वास्थ्य , उनके प्रबंधन तथा कल्याण  पर चर्चा की|

यूनाइट फाउंडेशन लखनऊ के तत्वावधान में बड़े धूमधाम से विश्व पशु चिकित्सा दिवस का आयोजन किया गया| इस अवसर पर पशु रोग उन्मूलन में टीकाकरण की उपयोगिता पर एक व्याख्यान माला का आयोजन किया गया था जिसमें दर्जनों विशेषज्ञ शामिल हुए| प्रमुख वक्ता के रूप में डॉक्टर एनडी शर्मा , पेट क्रैश एनिमल वेलफेयर संस्था के संस्थापक एवं भारतीय जन कल्याण बोर्ड के पूर्व प्रतिनिधि ने पशुओं के स्वास्थ्य प्रबंधन की कि स्वस्थ पशु जन्य  उत्पादों  की महत्ता पर प्रकाश डाला| उन्होंने कहा कि जब तक पशु स्वस्थ नहीं रहेगा उसका उत्पादन प्रभावित होगा और साथ साथ उसके उत्पाद की भी गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं की जा सकती है|इस अवसर पर डॉक्टर जीवन दत्त शर्मा संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पशु स्वास्थ्य की महत्ता को समझना परम आवश्यक है| पशुपालन विभाग के दूसरे अधिकारी डॉ यशी शर्मा ने पशु स्वास्थ्य के विषय में अपने अनुभवों को साझा किया|

इस अवसर पर भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के  राज्य प्रभारी डॉक्टर पी|के| त्रिपाठी ने कहा कि देश में पशु चिकित्सकों की भारी कमी है| साथ -साथ पशु चिकित्सालयों  की भी कमी है| उन्होंने  एक  ताजा आंकड़े का हवाला देते हुए बताया कि प्रति 5 हजार पशु पर एक स्नातक योग्यता वाला पशु चिकित्सक  कार्य कर रहा है और इसी प्रकार पशु चिकित्सालयों  की भी हमारी कमी है|  उन्होंने आगे बताया कि प्रत्येक राज्य की वर्तमान पशु संख्या (बड़े पशु)लीजिए और उसे वर्तमान स्नातक याउच्च योग्यता धारी पशुचित्सालय से  यदि भाग दें तो राज्यों  का आंकड़ा  निकाला जा सकता है मसलन उ|प्र|में लगभग 4|5 करोड़ बड़े पशु है किंतु पशु चिकित्सालय 2200 है|इस प्रकार लगभग 20  हजार पशु पर एक पशु चिकित्सालय हिस्सा  बैठेगा| इस बैठक का निचोड़ यही रहा है कि केंद्र या राज्य सरकार को पशु चिकित्सा प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए| इस अवसर पर यूनाइट फाउंडेशन के राधे श्याम दिक्षित  ने कहा कि पशु चिकित्सा या पशु कल्याण के विषय को आज आम आदमी  के बीच ले जाने की परम आवश्यकता है|

शहर के अन्य भागों से प्राप्त सूत्रों के अनुसार पशु प्रेमियों का एक बहुत बड़ा जत्था शहर के अनेक  चिकित्सालय तथा पॉलीक्लिनिक में  पहुंचकर टीकाकरण  अभियान में अपना हाथ बढ़ाया| कुछ पशु प्रेमी शहर के कई भागों में पशुओं के भोजन बांटने, आन स्पाट फर्स्ट एड देने, मरहम पट्टी करने, बीमार जानवरों  के रोग निदान से लेकर पशुओं पर दया करने के  लिए प्रचार-प्रसार किया| कुछ पशु प्रेमियों ने पशु कल्याण में लगे पशु चिकित्सकों को सम्मानित किया| इस अभियान में कविता दास, अमित सहगल , शिल्पी चौधरी, अनिल गुप्ता, जितेंद्र पांडे, यतींद्र त्रिवेदी  सहित दर्जनों पशु प्रेमी भाग लिए|