लिंग निर्धारित वीर्य (सैक्स्ड सीमेन) प्रजनन विज्ञान में एक एतिहासिक उपलब्धि

सैक्स्ड सीमेन का पशु प्रजनन के क्षेत्र में योगदान

पशु संदेश, 22 July 2019

सोनम भारव्दाज, संदीप व्दिवेदी, विकाश भारव्दाज

परिचय:

जैसा कि हम सभी जानते हैं, वीर्य (सीमेन) में दो प्रकार के शुक्राणु होते हैं : वाई गुणसूत्र (क्रोमोसोम) धारक शुक्राणु और एक्स गुणसूत्र (क्रोमोसोम) धारक शुक्राणु। जब नर का वाई क्रोमोसोम धारक शुक्राणु मादा के अण्डे से मिलता है तो नर पशु का जन्म होता है। इसके विपरीत जब नर पशु का एक्स  क्रोमोसोम धारक शुक्राणु मादा के अण्डे से मिलता है तो मादा पशु का जन्म होता है।

एक्स गुणसूत्र का आकार वाई गुणसूत्र की तुलना मे ज़्यादा होता है तथा इसमे उपस्थित डी. एन. ए. की मात्रा भी वाई गुणसूत्र की तुलना में 3 से 4 % अधिक होती है जिसको  फ्लोसाईटोमीटरी तकनीक के माध्यम से इस अंतर को परख लिया जाता है। वीर्य में उपस्थित एक्स और वाई क्रोमोसोम धारक शुक्राणुओं को अलग किया जा सकता है।
एक्स क्रोमोसोम वाले वीर्य के प्रयोग से मादा पशुओं का उत्पादन होता है और वाई क्रोमोसोम वाले वीर्य के प्रयोग से नर पशुओं का उत्पादन होता है। सीमेन की सैक्सिंग या लिंग निर्धारित वीर्य (सैक्स्ड सीमेन ) से मन चाहे लिंग (नर या मादा) के पशुओं का प्रजनन सम्भव हो गया है। इस विधी की सत्यता 90% से अधिक है।

सभी पशुपालक दूध उत्पादन के लिये केवल मादा पशुओं के जन्म की कामना करते हैं क्योंकि नर पशु उनके व्यवसाय मे कोई योगदान नही देते। ऐसी स्थिति में सैक्स्ड सीमेन  के प्रयोग से किसान मादा पशुओं का जन्म निर्धारित कर सकते हैं । सैक्स्ड सीमेन अब व्यापक रूप से उपलब्ध है और भारत मे भी आयातित लिंग निर्धारित वीर्य का प्रयोग बेहतर बछियां प्राप्त करने के लिए किया जा रहा हैं।

सैक्स्ड सीमेन के लाभ :

1. इसके प्रयोग से केवल बच्छड़ीयों का जन्म होता है। किसान को बच्छड़ों के लालन-पालन पर बेकार का खर्च नही करना पड़ता। ह्मारे देश की परिस्थितियों में सैक्स्ड सीमेन के प्रयोग से अधिक लाभ होगा।
2. अधिक बच्छड़ीयों के जन्म से किसान के पास अधिक संख्या मे दूध देने वाली गायें उपलब्ध रहेंगी।
3. क़िसान को बाहर से गायें/भैंसें नही खरीदनी पड़ेगीं जिससे बीमारियो की रोकथाम मे मदद मिलेगी।
4. सैक्स्ड सीमेन से गाभिन बच्छड़ीयों में प्रसव के दौरान कठिनाई नही होती। अत: इसका प्रयोग जवान बछियों मे अधिक उपयोगी है।  
5. इसके अलावा गायें/भैंसें मे भी कठिन प्रसव से राहत मिलती है। क्योंकि नर बच्चे का आकार बड़ा होता है जिससे कठिन प्रसव होने की सम्भावनायें अधिक होती हैं |

सावधानियां :

1. पारम्परिक वीर्य की तुलना में सैक्स्ड सीमेन में शुक्राणुओं की संख्या (लगभग 2 मिलियन प्रति डोज) बहुत कम होती है अत: इसके प्रयोग से गर्भाधारण की सम्भावना पारम्परिक वीर्य से लगभग 10 -15 % तक कम होती है। इसका प्रयोग उन क्षेत्रो में अधिक लाभकारी है जहॉं कृत्रिम गर्भाधान का काम अच्छा चल रहा है।
2. स्वस्थ एंव सामान्य रुप से गर्मी मे आने वाली जवान बछियों मे इसके प्रयोग से आपेक्षित नतीजे मिलते हैं।
3. सैक्स्ड सीमेन की कीमत पारम्परिक वीर्य की तुलना में कई गुना अधिक है। पशु चिकित्सक से ही इसका प्रयोग गर्मी के लक्षण देखकर सही समय पर करवाएं।

सारांश :

सैक्स्ड सीमेन आनुवंशिक रूप से बेहतर और लाभदायक होता है। इसकी कीमत भी पाराम्परिक वीर्य की तुलना मे अधिक है। इसमे शुक्राणुओं की संख्या लगभग 2 मिलियन प्रति डोज है अत: पशु चिकित्सक को ही इसका प्रयोग करना चाहिए। बच्छड़ीयों में सैक्स्ड सीमेन के उपयोग से अधिक लाभ मिलता है। इसके उपयोग से केवल बच्छड़ीयों का जन्म होता है और प्रसव के समय कठिनाई नही होती है । हमारे देश के किसानो के लिये सैक्स्ड सीमेन का इस्तेमाल बहुत उपयोगी और लाभदायक साबित होगा।

सोनम भारव्दाज, संदीप व्दिवेदी, विकाश भारव्दाज

सहायक प्राध्यापक, अपोलो कॉलेज ऑफ वेटरनरी मेडिसिन , जयपुर
व्याधिविज्ञान विभाग, नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय जबलपुर (म.प्र.)
नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय जबलपुर (म.प्र.)