Pashu Sandesh, 17 July 2026
भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है। देश हर साल लगभग 24 करोड़ टन से अधिक दूध का उत्पादन करता है, लेकिन एक दिलचस्प विरोधाभास यह है कि इतनी बड़ी उत्पादन क्षमता होने के बावजूद भारत आज भी यूरोप जैसे प्रीमियम डेयरी बाजारों में अपनी मजबूत उपस्थिति नहीं बना पाया है।
इसका सबसे बड़ा कारण रहा है फुट एंड माउथ डिजीज (FMD) का स्थानिक (Endemic) स्वरूप, जिसके चलते भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोग-मुक्त दर्जा प्राप्त नहीं हो सका।
अब केंद्र सरकार इस स्थिति को बदलने की तैयारी में है। केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह द्वारा ICAR के 98वें स्थापना दिवस पर की गई घोषणा इस संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरकार अगले दो वर्षों में नौ राज्यों को FMD-मुक्त प्रमाणन दिलाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। यदि यह प्रयास सफल होता है और विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (WOAH) से मान्यता प्राप्त हो जाती है, तो भारत पहली बार यूरोपीय संघ सहित कई विकसित देशों के डेयरी बाजारों में प्रभावी प्रवेश कर सकेगा।
आखिर FMD इतना बड़ा मुद्दा क्यों है?
FMD पशुओं में होने वाला अत्यंत संक्रामक वायरल रोग है, जो मुख्य रूप से गाय, भैंस, बकरी, भेड़ और सूअरों को प्रभावित करता है। इस बीमारी से पशुओं की मृत्यु दर भले ही बहुत अधिक न हो, लेकिन दूध उत्पादन में भारी गिरावट आती है, प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
यूरोपीय संघ और कई विकसित देश डेयरी उत्पादों के आयात के लिए FMD-मुक्त दर्जे को अनिवार्य मानते हैं। यही कारण है कि भारत अब तक इन बाजारों में सीमित पहुंच ही बना पाया है।
सरकार की रणनीति क्या है?
पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP) के तहत बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया गया है। सरकार के अनुसार 2021 में जहां FMD के 105 प्रकोप दर्ज हुए थे, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर केवल 40 रह गई।
NADCP को प्रमाणित बनाने के लिए देशभर में लगभग 38 करोड़ पशुओं को 13 अंकों की डिजिटल पहचान संख्या से टैग किया गया है। अब टीकाकरण की पुष्टि के लिए OTP आधारित प्रणाली भी लागू की गई है, ताकि केवल कागजों पर नहीं बल्कि वास्तव में पशुओं का टीकाकरण सुनिश्चित हो सके। टीकाकरण सत्यापन के लिए OTP आधारित प्रणाली लागू करना पशुधन प्रबंधन में डिजिटल पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम है। इससे फर्जी टीकाकरण रिपोर्टिंग पर अंकुश लगने की उम्मीद है।
कौन से राज्य हो सकते हैं सबसे आगे?
हालांकि सरकार ने अभी नौ राज्यों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन पशुपालन विभाग पहले ही कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड जैसे राज्यों में FMD-मुक्त जोन विकसित करने की संभावनाओं का अध्ययन कर चुका है। इन राज्यों में टीकाकरण कवरेज और रोग निगरानी अपेक्षाकृत बेहतर मानी जाती है।
डेयरी उद्योग को क्या फायदा होगा?
यदि इन राज्यों को विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (WOAH) से FMD-मुक्त प्रमाणन मिल जाता है, तो भारत क्षेत्र-आधारित निर्यात मॉडल अपना सकता है। इसका मतलब यह होगा कि पूरे देश के बजाय केवल रोग-मुक्त क्षेत्रों से उत्पादित दूध और डेयरी उत्पादों का निर्यात किया जा सकेगा।
डेयरी निर्यात पर संभावित प्रभाव
भारत का डेयरी निर्यात मुख्यतः घी, स्किम्ड मिल्क पाउडर, केसिन और कुछ विशेष उत्पादों तक सीमित रहा है। यूरोप, जापान, दक्षिण कोरिया और कई अन्य विकसित बाजार FMD-मुक्त क्षेत्र से उत्पादित डेयरी उत्पादों को प्राथमिकता देते हैं। ऐसे में यदि नौ राज्य प्रमाणित हो जाते हैं तो भारत क्षेत्र-आधारित (Regionalization) निर्यात मॉडल अपना सकता है, जिसमें केवल रोग-मुक्त क्षेत्रों से उत्पादित दूध और डेयरी उत्पादों का निर्यात किया जाएगा।
इससे भारतीय डेयरी कंपनियों को यूरोप, जापान, दक्षिण कोरिया और अन्य उच्च मूल्य वाले बाजारों तक पहुंच मिल सकती है। लंबे समय में इसका सीधा लाभ किसानों को बेहतर दूध मूल्य और अधिक बाजार अवसरों के रूप में मिल सकता है।
केवल निर्यात नहीं, किसानों की आय का भी सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि FMD नियंत्रण का लाभ केवल निर्यात तक सीमित नहीं रहेगा। बीमारी कम होने से पशुओं की उत्पादकता बढ़ेगी, दूध उत्पादन में सुधार होगा और उपचार पर होने वाला खर्च भी घटेगा। यही वजह है कि सरकार 2030 तक पूरे भारत को FMD-मुक्त बनाने के लक्ष्य पर काम कर रही है।
स्वदेशी वैक्सीन से बढ़ी ताकत
इस अभियान की एक और खास बात यह है कि भारत अब FMD, क्लासिकल स्वाइन फीवर (CSF), PPR और हाल ही में लॉन्च किए गए अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) जैसे रोगों के लिए स्वदेशी वैक्सीन विकसित कर चुका है। इससे देश की पशु स्वास्थ्य व्यवस्था अधिक आत्मनिर्भर बन रही है और बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाना आसान हो रहा है।
निष्कर्ष
नौ राज्यों को FMD-मुक्त दर्जा दिलाने की पहल भारत के डेयरी क्षेत्र के लिए एक संभावित गेम-चेंजर साबित हो सकती है। यदि सरकार रोग नियंत्रण, ट्रेसबिलिटी और अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन की प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक पूरा कर लेती है, तो यह केवल पशु स्वास्थ्य की उपलब्धि नहीं होगी, बल्कि भारतीय डेयरी उद्योग के वैश्विक विस्तार की दिशा में ऐतिहासिक कदम भी माना जाएगा। प्रधानमंत्री के 2030 तक भारत को पूर्णतः FMD-मुक्त बनाने के लक्ष्य की दिशा में यह पहला निर्णायक पड़ाव साबित हो सकता है।
आगे की राह
नौ राज्यों को FMD-मुक्त दर्जा दिलाना आसान काम नहीं होगा। इसके लिए लगातार निगरानी, जैव-सुरक्षा उपाय, पशुओं की आवाजाही पर नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप रोग सर्विलांस प्रणाली की आवश्यकता होगी। लेकिन यदि भारत इस लक्ष्य को हासिल कर लेता है, तो यह केवल पशु स्वास्थ्य क्षेत्र की उपलब्धि नहीं होगी, बल्कि भारतीय डेयरी उद्योग के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।
दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश अब दुनिया के सबसे बड़े डेयरी निर्यातकों में शामिल होने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। आने वाले दो वर्ष इस महत्वाकांक्षी यात्रा के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।
Dr Akash Waghmare: 09981739223