Pashu Sandesh, 29 July 2026
हर साल 29 जुलाई को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य बाघों के संरक्षण, उनके घटते प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को संतुलित बनाए रखने के प्रति जागरूकता फैलाना है। आज दुनिया के 70% से अधिक जंगली बाघ भारत में पाए जाते हैं, लेकिन यह सफलता रातों-रात नहीं मिली।
20वीं सदी के मध्य में अंधाधुंध शिकार, अवैध व्यापार और जंगलों की कटाई के कारण भारत में बाघों की संख्या बेहद कम हो गई थी। 1960 के दशक के अंत तक स्थिति इतनी चिंताजनक हो गई कि भारत के राष्ट्रीय पशु पर पूरी तरह विलुप्त होने का संकट मंडराने लगा।
इस संकट के समय राजस्थान के दूरदर्शी वन अधिकारी और प्रकृतिप्रेमी कैलाश सांखला आगे आए।
1971 में सांखला ने भारत का पहला राष्ट्रीय बाघ सर्वेक्षण आयोजित किया। उनके चौंकाने वाले आंकड़ों ने सरकार और पर्यावरणविदों को हिलाकर रख दिया। उनकी दूरदृष्टि और प्रयासों के परिणामस्वरूप तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में ऐतिहासिक निर्णय लिए गए:
प्रोजेक्ट टाइगर के पहले निदेशक के रूप में कैलाश सांखला—जिन्हें आदर से "टाइगर मैन ऑफ इंडिया" कहा जाता है—ने आधुनिक वन्यजीव संरक्षण की नींव रखी। उनका मानना था कि केवल बाघ को बचाना काफी नहीं है; यदि पूरे जंगल, नदियों और उनके शिकार चक्र (Prey Base) को सुरक्षित रखा जाए, तो बाघ स्वतः सुरक्षित हो जाएंगे।
कैलाश सांखला की उसी दूरदर्शी सोच का परिणाम है कि आज भारत में बाघों की दहाड़ फिर से गूंज रही है। हालाँकि, जंगलों के विखंडन, मानव-वन्यजीव संघर्ष और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियाँ आज भी बनी हुई हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस केवल अतीत की सफलताओं को मनाने का दिन नहीं है, बल्कि कैलाश सांखला जैसी महान हस्तियों के संकल्प को आगे बढ़ाने और अपनी प्राकृतिक धरोहर को संरक्षित करने का अवसर है।
डॉ आकाश वाघमारे
9981739223