उत्तर प्रदेश : पशुधन बीमा प्रीमियम पर 85% अनुदान देगी सरकार

Pashu Sandesh, 07 July 2026

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के किसानों, पशुपालकों और डेयरी उद्यमियों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए "मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना" को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई हालिया कैबिनेट बैठक में इस योजना के वित्तीय प्रावधान और कार्ययोजना को स्वीकृति प्रदान की गई। योजना के तहत पशुधन बीमा प्रीमियम का 85 प्रतिशत हिस्सा सरकार वहन करेगी, जबकि शेष 15 प्रतिशत राशि लाभार्थी पशुपालकों को देनी होगी।

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना हेतु 60 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। सरकार का लक्ष्य प्रदेश में 2.28 लाख से अधिक पशुओं का बीमा कराना है, जिससे पशुपालकों को पशुओं की मृत्यु, महामारी, प्राकृतिक आपदा अथवा दुर्घटनाओं से होने वाले आर्थिक नुकसान से राहत मिल सके।

योजना के वित्तीय ढांचे के अनुसार पशुधन बीमा प्रीमियम का कुल 85 प्रतिशत हिस्सा सरकार द्वारा वहन किया जाएगा, जबकि लाभार्थी पशुपालक को केवल 15 प्रतिशत प्रीमियम जमा करना होगा। इस 85 प्रतिशत सरकारी अनुदान में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत तथा उत्तर प्रदेश सरकार की हिस्सेदारी 34 प्रतिशत होगी। इस प्रकार केंद्र और राज्य सरकार के साझा सहयोग से पशुपालकों को न्यूनतम लागत पर पशुधन बीमा का लाभ उपलब्ध कराया जाएगा।

सरकार के अनुसार योजना प्रदेश के सभी 75 जिलों में लागू होगी। दावा स्वीकृत होने के बाद एक माह के भीतर बीमा भुगतान सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है।

पशुपालन विशेषज्ञों का मानना है कि प्रीमियम में इतनी बड़ी सरकारी भागीदारी पशुधन बीमा के दायरे को व्यापक बनाएगी और अधिक से अधिक पशुपालकों को अपने पशुओं का बीमा कराने के लिए प्रोत्साहित करेगी। विशेष रूप से छोटे, सीमांत एवं भूमिहीन पशुपालकों के लिए यह योजना आर्थिक जोखिम प्रबंधन का एक प्रभावी साधन साबित हो सकती है।

योजना का लाभ लघु एवं सीमांत किसानों, भूमिहीन पशुपालकों, डेयरी फार्म संचालकों तथा अन्य पात्र पशुपालकों को मिलेगा। यदि किसी बीमित पशु की महामारी, दैविक आपदा या आकस्मिक दुर्घटना के कारण मृत्यु हो जाती है तो बीमा राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में हस्तांतरित की जाएगी। वहीं, पशु के स्थायी रूप से विकलांग होने की स्थिति में बीमित राशि का 75 प्रतिशत तक भुगतान किया जाएगा।

पशुपालन विभाग का मानना है कि यह पहल न केवल पशुपालकों की आय को सुरक्षित करेगी, बल्कि राज्य में डेयरी एवं पशुधन क्षेत्र के विकास को भी नई गति देगी।