Pashu Sandesh, 27 July 2026
भारत को वर्ष 2030 तक फुट एंड माउथ डिजीज (FMD) मुक्त बनाने के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए बेंगलुरु के हेसरघट्टा स्थित सेंटर फॉर एनिमल हेल्थ एंड एजुकेशन (CEAH) में FMD रोग-मुक्त कम्पार्टमेंट (Disease-Free Compartments) की स्थापना पर पहली समन्वय बैठक आयोजित की गई। यह बैठक हाल ही में भुवनेश्वर में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला के बाद अगला महत्वपूर्ण चरण मानी जा रही है।
बैठक में FMD रोग-मुक्त कम्पार्टमेंट स्थापित करने की रूपरेखा पर चर्चा की गई, जिसमें विशेष रूप से सीमन स्टेशन और बुल मदर फार्मों को शामिल किया गया। ये संस्थान पशुधन की आनुवंशिक सुधार योजनाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इन्हें उच्च जैव-सुरक्षा मानकों के तहत रोग-मुक्त बनाए रखने की योजना है।
गौरतलब है कि 8 जुलाई 2026 को पशुपालन एवं डेयरी विभाग (DAHD) द्वारा भुवनेश्वर में “FMD के लिए कम्पार्टमेंटलाइजेशन एवं जोनिंग” विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई थी। इसमें अंतरराष्ट्रीय मानकों, रोग नियंत्रण रणनीतियों तथा भारत में इनके क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा हुई थी।
DAHD ने इस पहल के लिए कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र और गुजरात को प्राथमिकता वाले राज्य के रूप में चिन्हित किया है। ये राज्य देश के प्रमुख दुग्ध एवं पशुधन उत्पादक क्षेत्र हैं और यहां रोग-मुक्त कम्पार्टमेंट विकसित करने से पशु स्वास्थ्य प्रबंधन के साथ-साथ निर्यात संभावनाओं को भी बल मिलेगा।
FMD दुनिया के सबसे अधिक आर्थिक नुकसान पहुंचाने वाले पशु रोगों में से एक है। यह दूध उत्पादन, प्रजनन क्षमता और पशुओं की आवाजाही को प्रभावित करता है। भारत जैसे विश्व के सबसे बड़े दुग्ध उत्पादक देश के लिए FMD-मुक्त दर्जा प्राप्त करना वैश्विक डेयरी एवं पशुधन उत्पादों के बाजार में प्रवेश की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रोग-मुक्त कम्पार्टमेंट की सफलता के लिए व्यापक टीकाकरण, मजबूत निगरानी व्यवस्था, पशु पहचान एवं ट्रेसबिलिटी प्रणाली तथा कड़े जैव-सुरक्षा उपायों का पालन आवश्यक होगा। बेंगलुरु की यह बैठक इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम को जमीनी स्तर पर लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत मानी जा रही है।
डॉ आकाश वाघमारे
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