गौ संरक्षण,संवर्धन के लिए गौ हत्या निषेध का बने सख़्त केंद्रीय कानून: डॉ.वल्लभभाई कथीरिया

पशु संदेश, 31 August 2020

पिछले तकरीबन दो पखवाड़े से राष्ट्रीय कामधेनु आयोग द्वारा देश भर की गौशालाओं को लेकर गौशाला स्वावलंबन का अभियान संचालित कर रहा है। इस दिशा में गौशाला से जुड़े नए उद्योग और गौशाला की आवश्यकताओं को मद्दे नजर रखते हुए विभिन्न प्रकार की सुविधाएं प्रदान करने के लिए सहायता को मुख्य आधार बनाया है। इस विषय पर "पशु संदेश" के विशेष प्रतिनिधि-एसोसिएट एडिटर एवं भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के पूर्व प्रधान संपादक -डॉ. आर. बी. चौधरी से राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के अध्यक्ष-डॉ. वल्लभभाई कथीरिया की एक लंबी अंतरंग वार्ता हुई। जिसमें डॉ. कथीरिया ने बतौर आयोग के प्रथम अध्यक्ष के रूप में वर्तमान में चलाए जा रहे कार्यक्रमों एवं नीतियों का बेबाकी से जवाब दिया। चूँकि, यह साक्षात्कार तकरीबन एक घंटे का है और उन्होंने इसमें कई महत्वपूर्ण बातों की चर्चा की है, और हम चाहते हैं कि साक्षात्कार के पूरे वार्ताक्रम को पाठकों तक पहुंचाएं।इसलिए, हम इस साक्षात्कार को धारावाहिक प्रस्तुति के रूप में प्रकाशित कर रहें हैं|

साक्षात्कार का पहला अंक आपके समक्ष प्रस्तुत है..... प्रधान सम्पादक                                                                                                                                      

पशु संदेश (डॉ. आर. बी. चौधरी): राष्ट्रीय कामधेनु आयोग की प्रमुख नीतियां क्या है-आयोग गौ संरक्षण -संवर्धन एवं विकास की नीतियों में किस विषय को सबसे महत्वपूर्ण बात मानता है?

डॉ.वल्लभभाई कथीरिया : इसमें दो बातें हैं,राष्ट्रीय कामधेनु आयोग गौ संरक्षण संवर्धन के लिए समर्पित केंद्र सरकार की एक एपेक्स एडवाइजरी बॉडी है जो पूरे देश के गौ सेवा से संबंधित गोवंशीय पशुओं के रक्षण, संरक्षण, संवर्धन एवं विकास के लिए कार्य कर रही है। भारत के संविधान के आर्टिकल 48 , 48 -ए तथा 51 के अंतर्गत उल्लेख किए गए उपायों के तहत न केवल गाय बल्कि किसी भी जीव पर हिंसा नहीं की जा सकती। भारतीय परंपरा ,संस्कृति ,सभ्यता अध्यात्म इत्यादि को ध्यान में रखते हुए ऋषि -मुनियों ने भी गाय को अबध्य कहा है तथा सामाजिक ऐवम आर्थिक विकास में भी गाय की बहुत बाड़ी भूमिका रही है, इसीलिए गाय की उपेक्षा नहीं होनी चाहिए।आज गाय के महत्ता के वैज्ञानिक एवं ठोस आधार पर आयोग को सरकार को यह बताना चाहिए कि उनकी हत्या क्यों नहीं की जानी चाहिए। इसीलिए देश में संपूर्ण गौ हत्या निषेध का कानून आना चाहिए। इन्हीं उद्देश्यों को लेकर राष्ट्रीय कामधेनु आयोग प्रयासरत है कि अपने देश की संस्कृति ,परंपरा ऐवम अध्यात्म से जुड़ी हुई मूलभूत विशेषताओं को मद्देनजर रखते हुए यह निर्णय लिया जाए। राष्ट्रीय कामधेनु आयोग का मानना है कि समाज के निर्माण में गाय का प्रमुख योगदान है। राष्ट्र हित के लिए या राष्ट्र सेवा के लिए गाय का हत्या नहीं की जानी चाहिए तथा उनका उपयोग किया जाना चाहिए ताकि देश का विकास हो सके। इसीलिए राष्ट्रीय कामधेनु आयोग गो आधारित आरोग्य,गांव आधारित कृषि और गांव आधारित पर्यावरण व्यवस्था को गरीबी उन्मूलन के लिए बढ़ावा दिया जाना चाहिए।जैसा सर्व विदित है की गौ हत्या निषेध लागू करने वाले राज्यों में हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ आदि प्रदेशों सबसे आगे आए हैं । केंद्र सरकार द्वारा भी इस अवधारणा को राष्ट्रीय रूप दिया जाना चाहिए ताकि जिन प्रदेशों में गौ हत्या पर प्रतिबंध नहीं है और न ही उन प्रदेशों में गौ संरक्षण के उपाय और नीति है वहां भी गौ संरक्षण की नीतियों को लागू करवाया जा सके। गौ संरक्षण -संवर्धन के प्रभावी कार्यक्रमों को संचालित करने के लिए गौ हत्या निषेध हेतु केंद्रीय कानून लागू करना अत्यंत आवश्यक है।आयोग का लक्ष्य है कि जनता जो सुझाव दे उसका सबसे पहले स्वागत किया जाए। इस बात को हमने सबसे अधिक महत्व दिया है। इसलिए आयोग देश की आवश्यकता के अनुसार राष्ट्रीय विकास में आगे बढ़ रहा है ताकि माननीय भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में संचालित "आत्मनिर्भर भारत" अभियान के तहत गौ संरक्षण संवर्धन जरिए राष्ट्रीय विकास में योगदान दिया जाए। गौ संरक्षण संवर्धन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मे व्यापक सुधार की संभावनाएं हैं। इस दिशा में आयोग निरंतर कार्य कर रहा है, तथा गौ संवर्धन संरक्षण से रोजगार के नए अवसर निकलेंगे। युवाओं की बेरोजगारी दूर की जा सकेगी तथा भुखमरी और कुपोषण जनित समस्याओं पर भी निजात पाया जा सकेगा। इसलिए हमारा लक्ष्य है कि गोपालन से देश का कोई भी व्यक्ति न तो गरीब रहे और न ही अस्वस्थ । सरकार का यह प्रयास है कि आयोग गौ संवर्धन में लगे लोगों की हर प्रकार की सहायता करे।

(क्रमशः जारी.....)

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राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के प्रथम अध्यक्ष-डॉ. वल्लभभाई कथीरिया : एक संक्षिप्त परिचय

भारत सरकार द्वारा 21 फरवरी, 2019 को जारी किए गए आदेश के अनुसार, गुजरात के गौसेवा और गौचर विकास बोर्ड के पूर्व चेयरमैन डॉ. वल्लभभाई कथीरिया को राष्ट्रीय कामधेनु आयोग का पहला अध्यक्ष बनाया गया जो दिन -रात गौ संवर्धन संरक्षण के लिए समर्पित है। डॉ.कथीरिया सौराष्ट्र में एक प्रसिद्ध कैंसर सर्जन और देश के गौ सेवा संरक्षण संवर्धन के प्रख्यात नीति निर्माता एवं आधुनिक गौशाला विकास के व्यावहारिक कार्यों के विशेषज्ञ एवं अनुसंधानकर्ता हैं। पढ़ाई लिखाई में तेजतर्रार डॉ. कथीरिया बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता रहे हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में विभिन्न पदों पर सेवाएं दी है। उनका सभी संगठनों में कार्य उत्कृष्ट रहा है । डॉ. कथीरिया के उल्लेखनीय योगदान में चाहे 126 बार रक्तदान के अनुपम सेवाओं की बात करें या आम आदमी से लेकर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में निवास करने वाले बेसहारा मजदूर या सुदूर गांव में बसने वाले गरीब और कमजोर तबके के लोगों के प्राण रक्षा के लिए रक्त दान किया है। डॉ. कथीरिया हमेशा साफ-सुथरी, निष्पक्ष एवं निर्भीक छवि के राजनेता और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में आज भी खूब जाने जाते हैं। अपने उत्कृष्ट सेवाओं के माध्यम से 100 से अधिक गैर सरकारी प्रतिष्ठानों और सामाजिक संगठनों के साथ सेवारत रहे हैं। डॉ. कथरिया हमेशा शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक उत्थान के लिए संघर्षशील रहे हैं । अपने अमूल्य सेवाओं के माध्यम से गरीबों और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों की भलाई के लिए 10 से अधिक प्रसिद्ध संगठनों के अध्यक्ष और ट्रस्टी भी हैं। डॉ. कथीरिया ने बड़े संघर्षों के साथ वाटर हार्वेस्टिंग , पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण विकास और गौसेवा के क्षेत्र में कई उपलब्धियां हासिल की है। वर्ष 2001 में आए गुजरात के विनाशकारी भूकंप पीड़ितों की सुरक्षा, राहत प्रबंधन, पुनर्वास और समन्वय के लिए आज भी लोग याद करते हैं। डॉ. कथीरिया सबसे लोकप्रिय एम.पी. के रूप में राजकोट से 4 बार , वर्ष 1996-2009 तक लोक सभा सीट जीतें है और स्वतंत्रता के बाद पहली बार लगातार जीतने वाले सांसद रहे हैं। लोकसभा चुनाव में सबसे अधिक वोट प्राप्त करने वाले वह ऐसे राजनेता है जो लोकसभा चुनाव के इतिहास में अंकित हो गए। उल्लेखनीय है कि वर्ष 1998 में राजकोट से सर्वाधिक वोट से चुनाव जीतकर 12वीं लोकसभा पहुंचे थे । डॉ. कथीरिया सिर्फ सांसद ही नहीं , केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में भी उल्लेखनीय सेवाएं दे चुके है।इस दिशा में उन्हें वर्ष 1999-2004 की अवधि में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में भारी उद्योग, मानव संसाधन और स्वास्थ्य मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया था। डॉ. कथीरिया सदैव पार्टी की विचारधारा और आदर्शों का अनुसरण करते हुए देश की भलाई के लिए समर्पित रहे है। डॉ. कथीरिया की उल्लेखनीय योगदान के लिए अनगिनत राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से अलंकृत किया जा चुका है।