दुधारू पशुओं में थनैला रोग

पशु संदेश, 19 जून 2018

डाॅ. मधु शिवहरेे,  डाॅं. प्रियंका पाण्डे डाॅं.कविता रावत ए डाॅ. नवल रावत एवं दीपक नींगवाल

दुग्ध उत्पादन की द्वष्टि से थनैला रोग दुधारू पशुओं का एक महत्वपूर्ण संक्रामक रोग है जिसमें थनों के संक्रमित होने से दूध के उत्पादन में कमी हो जाती है। यह रोग कई प्रकार के रोगाणुओं के दुग्ध नली में प्रवेश करने से हो जाता है जैसे स्ट्रेप्टोकॉकस, स्टेफाईलोकॉकस , इ कोली, माइको बैक्टीरिया इत्यादि। इसके साथ ही गंदे फर्श, दोहक के गंदे हाथ तथा बर्तन के उपयोग से रोगाणु के थन में प्रवेश करने से भी यह रोग होता है। दूषित दूध के सेवन से गले में खराश, बैचेनी, उल्टी, दस्त आदि हो सकता है इसलिए यह रोग जनस्वास्थ्य एवं आर्थिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण है।

लक्षणः-

  • थन व अयन का आकार अनियमित होकर दर्द महसूस होता है
  • थन की कोमलता खत्म हो जाती है और थन को छूने पर काफी कड़ा महसूस होता है
  • प्रभावित पशु दोहते समय बैचेनी तथा थनों में सूजन आ जाती है
  • दूध के रंग में परिवर्तन व मात्रा में कमी हो जाती है
  • दूध में मवाद/थक्के/पपड़ी/रक्त के छीटें पाए जाते हैं

थनैला रोग से दूध बदलाव
1.    पोटासियम एवं लेक्टोफेरिन में कमी
2.    दुग्ध प्रोटीन केसिन में कमी
3.    कैल्शियम में कमी
4.    सोमेटिक सेल काउन्ट बढने से दुग्ध की गुणवत्ता में कमी हो जाती है        

उपचारः-

  • रोग की अवस्था के अनुसार उपचार करना चाहिए जैस अयन की सफाई ज¨ बर्फ या मैग्नीशियम सल्फेट को गुनगुने पानी में डालकर की जाती है।
  • थन में डालने वाली दवा, जैसे- मेस्टेलान, फ्लोक्लाक्स, मेमीटल आदि का उपयोग किया जाता है।
  • लक्षणों के आधार पर एन्टीबाॅयोटिक, ऐन्टीहिस्टामिनिक तथा विटामिन के इंजेक्शन उचित मात्रा व अवधि में लगाया जा सकता है।

बचाव के उपायः-

  • थनों व अयनों को साफ व कीटाणु रहित कपड़े से पोछना चाहिए।
  • दोहक को स्वच्छ कपड़े पहनना चाहिए तथा उपरोक्त घोल से हाथ, थन व बर्तन साफ कर लेना चाहिए।
  • दुग्धशाला का वातावरण स्वच्छ एवं कीटाणु रहित होना चाहिए।
  • गौशाला का फर्श समतल एवं साफ होना चाहिए। फर्श को प्रतिदिन किसी अच्छे घोल जैसे- डेटाल, लाल दवा, फिनायल के  घोल से धोकर साफ करना चाहिए
  • यह रोग प्रायः गाय/भैसों आदि में जनन के बाद पाया जाता है। अतः गाय की शुष्क अवस्था में समस्त थनों की दुग्ध नलिकाओं कें अंदर ट्यूब दवा की मात्रा को डालकर छोड़ देते हैं|

Dr Madhu Shivhare , Assistant professor , college of veterinary science & A.H. , Mhow (M.P.)

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